वर्ण और ध्वनि कभी-कभी वर्ण के लिए ध्वनि या ध्वनि के लिए वर्ण शब्द का प्रयोग होता है, फिर भी दोनों में अंतर है।
"मुँह के विभिन्न अवयवों या उच्चारण स्थानों से जो वर्ण या वर्णों के समूह उच्चरित होते है उन्हें ध्वनि कहते हैं।" उपरित ध्वनि अर्थपूर्ण हो, तो वह व्याकरण की दृष्टि से ध्वनि है और यदि उसका कोई अर्थ न हो, तो वह 'निरर्थक ध्वनि' कहलाती है। लिखते समय वर्णों को जोड़कर शब्द बनाया जाता है और शब्दों से वाक्य वर्णों के सही मेल से 'सार्थक शब्द' बनते हैं, अगर वर्णों का सही मेल न हो, तो 'निरर्थक शब्द बनते हैं। ध्वनि मुँह द्वारा उच्चरित होती है और कान द्वारा सुनी जाती है। वर्ण किसी संकेत द्वारा हाथ से लिखा जाता है या किसी यंत्र द्वारा छापा जाता है ।
स्पष्ट है कि मौखिक भाषा की सबसे छोटी इकाई 'ध्वनि' है और लिखित भाषा की सबसे छोटी इकाई 'वर्ण'। कभी-कभी ध्वनि समान होते हुए भी उसके अर्थ और लिपि में अंतर होता है। जैसे- हिन्दी की 'कम' ध्वनि और अँगरेजी की 'come' ध्वनि में ध्वनिगत समानता है, लेकिन अर्थ और लिपि में अंतर है।
लिपि-भाषा के मुख्यतः दो रूप हैं—मौखिक और लिखित मौखिक भाषा में ध्वनियाँ मुख द्वारा उच्चरित होती हैं। यदि उन उच्चरित ध्वनियों को किसी चिह्न या संकेत द्वारा मूर्त रूप दें, तो वह लिखित भाषा (लिखित रूप) 'लिपि' कहलाएगी। अर्थात्, "भाषा-ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने हेतु निश्चित किए गए संकेतों या चिह्नों को लिपि कहते हैं।"
हिन्दी जिस लिपि में लिखी जाती है, उसे 'देवनागरी' लिपि कहते हैं । इस लिपि में संस्कृत, मराठी और नेपाली भाषाएँ लिखी जाती हैं। पंजाबी भाषा 'गुरुमुखी' में तथा अँगरेजी 'रोमन' लिपि में लिखी जाती है। उर्दू और कश्मीरी की लिपि 'फारसी' कहलाती है।
संसार की अधिकतर लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती हैं। जैसेदेवनागरी, गुरुमुखी, रोमन आदि । इसके विपरीत फारसी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती है। चीनी-जापानी भाषाएँ तो ऊपर से नीचे लिखी जाती हैं।
अक्षर : कुछ वैयाकरण के अनुसार – जिसका क्षर न हो, वह 'अक्षर' है। क् ख् आदि । अर्थात्-वर्ण ही अक्षर है।
आधुनिक वैयाकरण वर्ण और अक्षर में अंतर मानते हैं। उनका मत है कि स्वर स्वरसहित व्यंजन अक्षर है। जैसे—अ आ क खो आदि।
अक्षर के प्रकार १. स्वतंत्र अक्षर (independent syllable
केवल स्वर के बने होते है जैसे अ, आ, ई, उ आदि ।
) २. संयुक्त अक्षर (combined syllable
स्वर व व्यंजन के सायोजन से बने अक्षर जैसे का, कि, चु, ये, आदि। )
इनके अनुसार लड़का शब्द में तीन अक्षर है—ल+ड+का, लेकिन वर्णों की संख्या छ: है—ल+अ+ड+अ+क+आ।
इस तरह अक्षर चार प्रकार के होते हैं
(1)एक वर्ण वाले अक्षर—(सभी स्वर अ,आ,ई, आदि)
(2) दो वर्ण वाले अक्षर—(क,ख,ग,की,खु,खै आदि)
(3) तीन वर्ण वाले अक्षर—(क्ष,त्र,ज्ञ,श्र,त्व,त्न,त्थ आदि)
(4) चार वर्ण वाले अक्षर—(ज्जव,त्तव,स्थय आदि)
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स्वर :
ऐसी ध्वनियॉं जिनका उच्चारण करने में अन्य किसी ध्वनि की सहायता की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें स्वर कहते हैं।
जिन स्वरों के अच्चारण में कम समय लगता है उन्हें (ह्रस्व स्वर)
जिनके अच्चारण में अधिक समय लगता है उन्हें (दीर्घ स्वर) कहते है
दो स्वरों को मिलाकर बनते है उन्हें (सयुंक्त स्वर) कहते है
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर है
स्वरों के मात्रा रूप इस प्रकार है :
अ : कोई मात्रा नहीं है
अ
आ
ा
इ
ि
ई
ी
उ
ु
ऊ
ू
ए
े
ऐ
ै
ओ
ो
औ
ऋ
ौ
ृ
अ [a]
आ [aa]
इ [i]
ई [ee]
उ [u]
ऊ [oo]
ऋ [ri]
ए [e]
ऐ [ai]
ओ [o]
औ [au]
अं [an]
अः [ah]
नोट: अं को अनुस्वार और अः को विसर्ग कहते है | और ये वे वर्ण है जो ना ही स्वर में और न ही व्यंजन Varnamala में शामिल है | इन्हें अयोगवाह कहते है क्योकि ये अ के योग से बने होते है और व्यंजन वर्णों का उच्चारण वहन (carry) करते हैं | उच्चारण करते वक्त ये वर्ण हमेशा स्वर के बाद और व्यंजन से पहले आता है |
जैसे रंग में (र् + अ + ं + ग) अं वर्ण अ के बाद और ग से पहले आ रहा है |
अं के उदहारण – झंडा, अंग, नंबर, गंगा, पंखा, झारखंड
अः के उदहारण – छः, अतः, मुख्यतः, प्रात:, पुन:, निःशुल्क
नोट: ऋ (ri) आधा स्वर है लेकिन भारत सरकार ने इसको पूरा स्वर माना है |
इन सभी स्वर से बनने वाले शब्द के उदहारण नीचे दिया गया है |
Hindi Varnamala Consonant (हिंदी वर्णमाला व्यंजन)
वे वर्ण जिनके उच्चारण यानि बोलने के लिए स्वर की आवश्यकता होती है व्यंजन कहलाते है। बिना स्वर की सहायता के व्यंजन वर्णों का उच्चारण नहीं हो सकता है |
इन्हें पांच वर्गों तथा स्पर्श, अन्तस्थ एवं ऊष्म व्यंजनों में बांटा जाता है
उदहारण – क = क् + अ
हिंदी वर्णमाला में व्यंजन की संख्या 33 है | और अगर पारंपरिक हिंदी वर्णमाला की बात की जाए तो 33 व्यंजन के अलावा4 संयुक्त व्यंजन और 2 द्विगुण व्यंजन भी है |
अगर आप के बच्चे नर्सरी से 5वीं कक्षा तक है तो उनके पाठ्यक्रम (syllabus) में 33 व्यंजन (क से ह तक) है | और यदि आपके बच्चे उच्च कक्षाओं में है तो 33 व्यंजन के अलावा4 संयुक्त व्यंजन को भी जानना होगा |
हमने 33 व्यंजन और4 संयुक्त व्यंजन को उनके उच्चारण के साथ नीचे लिखा है | हिंदी सिखने के लिए इन सभी व्यंजन का ज्ञान होना बेहद जरुरी है |
क [ka]
ख [kha]
ग [ga]
घ [gha]
ङ [nga]
च [cha]
छ [chha]
ज [ja]
झ [jha]
ञ [eyan]
ट [ta]
ठ [tha]
ड [da]
ढ [dha]
ण [nna]
त [ta]
थ [tha]
द [da]
ध [dha]
न [na]
प [pa]
फ [pha]
ब [ba]
भ [bha]
म [ma]
य [ya](अन्तस्थ)
र [ra](अन्तस्थ)
ल [la](अन्तस्थ)
व [va](अन्तस्थ)
श [sha](ऊष्म)
ष [shha](ऊष्म)
स [sa](ऊष्म)
ह [ha](ऊष्म)
क्ष [ksha] (संयुक्ताक्षर)
त्र [tra](संयुक्ताक्षर)
ज्ञ [gya](संयुक्ताक्षर)
श्र [shra](संयुक्ताक्षर) 👈👉
वर्णों के उच्चारण स्थान - भाषा को शुद्ध रूप में बोलने और समझने के लिए विभिन्न वर्णों के उच्चारण स्थानों को जानना आवश्यक है