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उपसर्ग

 

वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व में लगकर नये शब्द का निर्माण करते हैं अर्थात् नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते है,


हिन्दी में उपसर्ग तीन प्रकार के होते है

1. संस्कृत के उपसर्ग 2हिन्दी के उपसर्ग 3 विदेशी उपसर्ग

संस्कृत के उपसर्ग की संख्या 22 होती है, ये उपसर्ग हिंदी में भी प्रयुक्त होते है

 उपसर्ग       :      अर्थ 👇

 अति : अधिक/परे

अधि : प्रधान /श्रेष्ठ

अनु : पीछे / समान

अप : बुरा /विपरीत

अभि : पास/ सामने

                  अव :बुरा /हीन

                    आ: तक / से

उत् : ऊपर / श्रेष्ठ

उप : पास / सहायक

 दुर् :कठिन, बुरा, विपरीत

दुस् : बुरा / विपरीत / कठिन

नि : बिना/ विशेष

निर् : बिना / बाहर

निश् : बिना / बाहर

प्र : आगे / अधिक

प्रति : प्रत्येक / विपरीत

परा : विपरीत /पीछे/ अधिक

परि : चारों ओर / पास

वि : विशेष /भिन्न

सु : अच्छा /सरल

सम् : अच्छी तरह / पूर्ण शुद्ध

अन् : नहीं / बुरा


 

शब्द – उपसर्ग+ मूल शब्द
अदम्य – अ+ दम्य
अनुपात – अनु+ पात
अनुवाद – अनु+ वाद
अवरोध – अव+ रोध
नापसंद – ना+ पसंद
पुनर्जीवन – पुनः(पुनर्)+ जीवन
प्रकार – प्र+ कार
प्रयोग – प्र+ योग
विरुद्ध – वि+ रुद्ध
संकलन – सम्+ कलन
अनिच्छा – अर्+ इच्छा
अनुभव – अनु+ भव
अनेक – अनु+ एक
असहाय – अ+ सहाय
नासमझ – ना+ समझ
परिश्रम – परि+ श्रम
प्रतिशत – प्रति+ शत
विक्रेता – वि+ क्रेता
विश्राम – वि+ श्राम

📖🪔Yt-@ Vivadial