श्रीरामरक्षा स्तोत्रं

श्रीरामरक्षा स्तोत्रं— ॥ ऊँ श्रीगणेशाय् नमः ॥ अस्य् श्रीराम् रक्षा स्तोत्रमन्त्रस्य। बुधकौशिक् ऋषिः । श्रीसीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप् ...

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Friday, September 29, 2017

श्रीरामरक्षा स्तोत्रं

श्रीरामरक्षा स्तोत्रं—
॥ ऊँ श्रीगणेशाय् नमः ॥
अस्य् श्रीराम् रक्षा स्तोत्रमन्त्रस्य। बुधकौशिक् ऋषिः ।श्रीसीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप् छंदः ।सीता शक्तिः। श्रीमद् हनुमान कीलकम्।श्रीरामचंद्र्प्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः॥
॥अथ धयानम् ॥ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बध्दपद्मासनस्थम् ।पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्।वामांकारुढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभम् ।नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामंडनं रामचंद्रम्॥॥इति ध्यानम्॥
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥१॥ध्यात्वा नीलोत्पलशयामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमंडितम्॥२॥सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् । स्वलील्या जगत्रातुं आविर्भूतं अजं विभुम्॥३॥रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्। शिरोमे राघवः पातु भालं दशरथात्मज: ॥४॥कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियश्रुती घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल: ॥५॥जिव्हां विधानिधिः पातु कंठं भरतवंदित:। स्कंधौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेश्कार्मुक:॥६॥करौ सीतापतिः पातु ह्रूदयं जामदग्न्यजित्। मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु:। ऊरु रघुत्तम: पातु रक्षःकुलविनाशकृत्॥८॥एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुक्रुती पठेत्। स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥१०॥पातालभुतलव्योम,चारिणश्छ्धचारिण:। न द्रुष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि:।११॥रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्य्ते पापे: भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥१२॥जगजैत्रैमत्रेण राम्नाम्नाभिरक्षितम्। य: कंठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिध्दय: ॥१३॥वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमंगलम ॥१४॥आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षांमिमां हर:। तथा लिखितवान् प्रात: प्रभुध्दो बुधकौशिक: ॥१५॥आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम् । अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान् स न: प्रभु: ॥१६॥तरुणौ रुपसंपन्नौ सुकुमरौ महाबलौ। पुंडरीकविशालाक्षौ चिरकृष्णाजिनाम्बरौ॥१७॥फलमुलाशिनौ दान्तौ तापसौ बृह्मचारिणौ। पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्षमणौ ॥१८॥शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठो सर्वधनुष्मताम्। रक्ष: कुलनिहंतारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ॥१९॥आत्तसज्जधनुषा,विषुस्पृशावक्षयाशुगनिषंसंगिनौ। रक्षणाय मम रामलक्षमणावग्रत: पथि सदैव गचछताम् ॥२०॥सन्नध्द: कवची खड्गी चापबाणधरो युवा। गच्छन्मनोरथोस्माकं राम: पातु सलक्षमण:॥२१॥रामो दाशरथि: शुरो लक्षमणानुचरो बली। काकुत्स्थ: पुरुष: पुर्ण: कौसल्येयो रघुत्तम:॥२२॥वेदान्तवेधो यज्ञेश: पुराणपुरुषोतम:। जानकीवल्लभ: श्रीमान् अप्रमेय प्रराक्रम: ॥२३॥इत्येतानि जपन्नित्यं मड्भ्क्त: श्रध्दयान्वित:। अश्वमेधाधिकं पुण्यं स्ंप्राप्नोति न संशय: ॥२४॥रामं लक्षमणपुर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम् । काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्।राजेंद्रम् सत्यसंधं दशरथतनयं शयमलं शांतमूर्तिम्। वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥२६॥रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे । रघुनाथाय नाथय सीताया: पतये नम: ॥२७॥श्रीराम राम रघुनंदन राम राम। श्रीराम राम भरताग्रज राम् राम्।श्रीराम राम रणकर्कश राम राम। श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥श्रीरामचंद्रचरणौ मनसा स्मरामि। श्रीरामचंद्रचरणौ वचसा गृणामि। श्रीरामचंद्रचरणौ शिरसा नममि। श्रीरामचंद्रचरणौ शरंण प्रपघे॥२९॥ माता रामो मत्पिता रामचंद्र: । स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र:।सर्वस्वं मे रामचंद्रो दयालु:। नान्य्ं जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥दक्षिणे लक्षमणो यस्य वामे तु जनकात्मजा। पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम् ॥३१॥लोकाभिरामं रणरंगधीरम्। राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरुप्ं करुणाकरं तम्। श्रीरामचंद्रम् शरणं प्रपद्ये ॥३२॥मनोजवं मारुततुल्यवेगम्। जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयुथमुख्यम्। श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥कुजंतं राम रामेति मधुरं मधुराक्षरम्। आरुह्य काविताशाखां वंदे वाल्मीकिकोकिलम् ॥३४॥आपदां अपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥३५॥भर्जनं भवबीजानां अर्जनं सुखसमप्दाम् । तर्जनं यमदूतानां राम् रामेति गर्जनम् ॥३६॥रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे।रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम:। रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोस्म्यहम्।रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुध्दर् ॥३७॥राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥
इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं संपूर्णम् ॥

Tuesday, September 12, 2017

शिवताण्डव स्तुति

शिवताण्डवस्तोत्रम्
जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले
गलेऽव-लम्ब्य-लम्बितां-भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम्
डमड्डमड्डमड्डम-न्निनादव-ड्डमर्वयं
चकार-चण्ड्ताण्डवं-तनोतु-नः शिवः शिवम् .. 1..

जटा-कटा-हसं-भ्रम भ्रमन्नि-लिम्प-निर्झरी-
-विलोलवी-चिवल्लरी-विराजमान-मूर्धनि
धगद्धगद्धग-ज्ज्वल-ल्ललाट-पट्ट-पावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम .. 2..
धरा-धरेन्द्र-नंदिनी विलास-बन्धु-बन्धुर
स्फुर-द्दिगन्त-सन्तति प्रमोद-मान-मानसे
कृपा-कटाक्ष-धोरणी-निरुद्ध-दुर्धरापदि
क्वचि-द्दिगम्बरे-मनो विनोदमेतु वस्तुनि .. 3..

जटा-भुजङ्ग-पिङ्गल-स्फुरत्फणा-मणि प्रभा
कदम्ब-कुङ्कुम-द्रव प्रलिप्त-दिग्व-धूमुखे
मदान्ध-सिन्धुर-स्फुरत्त्व-गुत्तरी-यमे-दुरे
मनो विनोदमद्भुतं-बिभर्तु-भूतभर्तरि .. 4..

सहस्र लोचन प्रभृत्य-शेष-लेख-शेखर
प्रसून-धूलि-धोरणी-विधू-सराङ्घ्रि-पीठभूः
भुजङ्गराज-मालया-निबद्ध-जाटजूटक:
श्रियै-चिराय-जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः .. 5..

ललाट-चत्वर-ज्वलद्धनञ्जय-स्फुलिङ्गभा-
निपीत-पञ्च-सायकं-नमन्नि-लिम्प-नायकम्
सुधा-मयूख-लेखया-विराजमान-शेखरं
महाकपालि-सम्पदे-शिरो-जटाल-मस्तुनः .. 6..

कराल-भाल-पट्टिका-धगद्धगद्धग-ज्ज्वल
द्धनञ्ज-याहुतीकृत-प्रचण्डपञ्च-सायके
धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-कुचाग्रचित्र-पत्रक
-प्रकल्प-नैकशिल्पिनि-त्रिलोचने-रतिर्मम … 7..

नवीन-मेघ-मण्डली-निरुद्ध-दुर्धर-स्फुरत्
कुहू-निशी-थिनी-तमः प्रबन्ध-बद्ध-कन्धरः
निलिम्प-निर्झरी-धरस्त-नोतु कृत्ति-सिन्धुरः
कला-निधान-बन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः .. 8..

प्रफुल्ल-नीलपङ्कज-प्रपञ्च-कालिमप्रभा-
-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचिप्रबद्ध-कन्धरम् .
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकछिदं तमंतक-च्छिदं भजे .. 9..

अखर्व सर्व-मङ्ग-लाकला-कदंबमञ्जरी
रस-प्रवाह-माधुरी विजृंभणा-मधुव्रतम्
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्त-कान्ध-कान्तकं तमन्तकान्तकं भजे .. 10..

जयत्व-दभ्र-विभ्र-म-भ्रमद्भुजङ्ग-मश्वस-
द्विनिर्गमत्क्रम-स्फुरत्कराल-भाल-हव्यवाट्
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्ग-तुङ्ग-मङ्गल
ध्वनि-क्रम-प्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः .. 11..

दृष-द्विचित्र-तल्पयोर्भुजङ्ग-मौक्ति-कस्रजोर्
-गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्वि-पक्षपक्षयोः
तृष्णार-विन्द-चक्षुषोः प्रजा-मही-महेन्द्रयोः
समप्रवृतिकः कदा सदाशिवं भजे .. 12..

कदा निलिम्प-निर्झरीनिकुञ्ज-कोटरे वसन्
विमुक्त-दुर्मतिः सदा शिरःस्थ-मञ्जलिं वहन् .
विमुक्त-लोल-लोचनो ललाम-भाललग्नकः
शिवेति मन्त्र-मुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् .. 13..

इदम् हि नित्य-मेव-मुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धि-मेति-संततम्
हरे गुरौ सुभक्ति-माशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् .. 14..

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः
शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः .. 15..

Saturday, September 2, 2017

देवियांण

                            देवियांण
|| अथ ग्रंथ देवियांण || =============================== [ छन्द अटल ] करता हरता ‌श्री ह्यींकारी, काली कालरयण कोमारी; ससि सेखरा सिधेसर नारी , जग नीमवण जयो बडधारी||1|| धवा धवळगर धव धू धवळा, क्रसना कुबजा कचत्री कमळा; चलाचला चामुन्डा चपला, विकटाविकट भू बाला विमला||2|| सुभगा सिवा जया श्री अम्बा , परिया परंपार पालंबा ; पिसाचणि साकणि प्रतिबंबा, अथ आराधिजे अवलंबा||3|| सं कालिका सारदा समया, त्रिपुरा तारणि तारा त्रनया; ओहं सोहं अखया अभया, आई अजया विजया उमया||4|| >>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<<< *** छन्द भुजंगी *** देवी उम्मया खम्मया ईसनारी , देवी धारणी मुंड त्रिभुवन्न धारी; देवी सब्बदां रूप ॐ रूप सीमा , देवी वेद पारख्ख धरणी ब्रहम्मा ||1|| देवी कालिका मां नमो भद्रकाली , देवी लाघवं चारिताली; देवी दानवां काळ सुरपाळ देवी, देवी साधकं चारण सिधं सेवी||2|| देवी जख्खणी भख्खणी देव जोगी , देवी निर्मला भोज भोगी निरोगी; देवी मात जानेसूरी ब्रत्र मेहा, देवी देव चामुन्ड संख्याति देहा||3|| देवी भंजणी दैत सेना समेता , देवी नेतना तप्पना जया नेता ; देवी कालिका कूबजा कामकामा , देवी रेणुका सम्मला राम रामा ||4|| देवी मालणी जोगणी मत मेधा , देवी वेधणी सुर असुरां उवेधा; देवी काम ही लोचना हाम कामा , देवी वासनी मेर माहेस वामा ||5|| देवी भूतड़ा अम्मरी वीस भूजा , देवी त्रिपुरा भैरवी रूप तूजा ; देवी राखसं धोम रे रक्त रूती , देवी दुज्र्जटा विकट्टा जम्मदूती ||6|| देवी गौरी रूपां अखां नव्व निद्धि, देवी सक्कळा अक्कळा स्रव सिद्धि; देवी व्रज्ज विमोहणी वोम वांणी , देवी तोतला गूंगला कतियांणी ||7|| देवी चंद्रघंटा महम्माया चण्डी , देवी वीहळा अन्नला वड्ड वड्डी; देवी जम्मघंटा वदीजे जडंबा , देवी साकणी डाकणी रूढ सब्बा ||8|| देवी कटकां हाकणी वीर कंवरी , देवी मात वागेसरी महागवरी; देवी दंडणी देव वैरी उदंडा,देवी वज्जया जया दैतां विखंडा ||9|| देवी खेचरी भूचरी भद्रखेमा , देवी पद्माणी सोभणी कलह प्रेमा ; देवी जम्मणी मख्ख आहूती ज्वाला , देवी वाहनी मंत्र लीला विसाला ||10|| देवी मंगला वीजळा रूप मध्धे , देवी अब्बळा सब्बळा वोम अध्धे; देवी स्रग्ग सूं उतरी सिव माथे , देवी सगर सुत हेत भगिरथ्थ साथे ||11|| देवी हारणी पाप श्री हरि रूपा , देवी पावनी पतितां तीर्थ भूपा ; देवी पुण्य रूपं देवी प्रम्म रूपं , देवी क्रम्म रूपं देवी ध्रम्म रूपं ||12|| देवी नीर देख्यां अघं ओघ नासे , देवी आतमानंद हीये हुलासे ; देवी देवता स्रब्ब तूं मां निवासे , देवी सेवते शिव सारूप भासे ||13|| देवी नाम भागीरथी नाम गंगा , देवी गंडकी गोगरा रामगंगा; देवी सर्सती जम्मना सरी सिद्धा, देवी त्रिवेणी त्रिस्थली ताप रूद्धा ||14|| देवी सिन्धु गोदावरी मही संगा , देवी दोमती धम्मला बाणगंगा; देवी नर्मदा सारजू सदा नीरा , देवी गल्लका तुंगभद्रा गंभीरा ||15|| देवी कावेरी तापि क्रस्ना कपीला , देवी सोण सतलज्ज भीमा सुसीला ; देवी गोम गंगा , देवी वोम गंगा , देवी गुप्त गंगा , देवी गुप्त गंगा सुची रूप अंगा ||16|| देवी नीझरण नवे सो नदी नाळा, देवी तोय ते तवां रूप तुहाळा; देवी मथुरा माइया मोक्षदाता , देवी अवंती अजोध्या अघ्घहाता||17|| देवी कहां द्वारामति कांचि कासी , देवी सातपुरी परम्मा निवासी ; देवी रंग रंगे रमे आप रूपे , देवी घृत नैवेद ले दीप धूपे ||18|| देवी रग्त बंबाल गळमाळ रूंडा , देवी मूढ पाहारणी चंड मुंडा ; देवी भाव स्वादे हसंते वकत्रे , देणी पाणपाणां पिये मद्य पत्रे ||19|| देवी सहस्त्रं लखं कोटीक साथे , देवी मंडणी जुद्ध मैखास माथे; देवी चापड़े चंड नै मुंड चीना, देवी देव द्रोही दुहु धम्मी दीना ||20|| देवी धूमलोचन हूंकार धोंस्यो , देवी जाडबा में रक्तबीज सोस्यो ; देवी मोडीयो माथ निसुंभ मोड़े , देवी फोड़ियो सुंभ जी कुंभ फोड़े ||21|| देवी सुंभ निसुंभ दर्पांध छळिया, देवी देव स्रग थापिया दैत दळिया; देवी संघ सुरां तणा काज सीधा, देवी क्रोड़ तेतीस उच्छाब कीधा ||22|| देवी गाजता दैच ता वंस गमिया , देवी नवे खंड त्रिभुवन तुझ नमिया; देवी वन्न में समाधी सुरथ ब्रन्नी , देवी पूजते आसपूर्णा प्रसन्नी ||23|| देवी वैस सूरथ्थ रा दीह वळिया , देवी तवन तोरा कियां सोक टळिया; देवी मारकंडे महा पाठ बांध्यो, देवी लगो तव पाय नो पार लाध्यो ||24|| देवी सप्तमी अष्टमी नोम नूजा , देवी चौथ चौदस्स पूनम्म पूजा; देवी सर्सती लख्खमी महाकाळी , देवी कत्र विस्नु ब्रहम्मा कपाली ||25|| देवी रग्त नीलंमणी सीत रंगं , देवी रूप अंबार विरूप अंगं ; देवी बाल युवा वृधं बेस वाळी, देवी विस्व रखवाळ बीसां भुजाळी ||26|| देवी वैस्णवी महेसी ब्रहम्माणी, देवी इन्द्रांणी चंद्रांणा रत्रा रांणी; देवी नारसिंघी वराही विख्याता, देवी इला आधार आसूर हाता ||27|| देवी कौमारी चामुण्डा विजैकारी, देनी कुबेरी भैरवी क्षेमकारी ; देवी मृगेसं व्रख्ख हस्ती मइखे , देवी पंख केकी गरूड़ धिरट पंखे ||28|| देवी रथ्थ रेवंत सारंग राजे, देवी वीमाणं पालखी पीठ व्राजे; देवी प्रेत आरूढ आरूढ पद्मं , देवी सागरं सुमेरू गूढ सद्मं ||29|| देवी वाहनं नाम कै वप्पवाळी , देवी खग्ग सूळंधरा खप्परवाळी; देवी कोप रे रूप माता में काळजेता, देवी कृपा रे रूप माता जणेता||30|| देवी जग्त कर्तार भर्ता संहरता , देवी चराचर जग्ग सब में विचरता ; देवी चार धामं स्थंल अष्ट साठे , देवी पाविये एक सौ पीठ आठे||31|| देवी माई हिंगोल पच्छम्म माता , देवी देव देवाधि वरदान दीता ; देवी गंद्रपावास अर्बद्द ग्रामे , देवी थाण उडीयांण समसाँण ठामे|| 32|| दवी गढो कोढे गरत्रार गोखे , देवी सिंधु वेळा सवालाख सोखे ; देवी कामरू पीठ अघ्घोर कूंड़े , देवी खंखरे द्रुमे कस्मेर खंडे ||33|| देवी उतरा जोगणी पर उजेणी , देवी भाल भरूअच्च भजनेरी भेणी ; देवी देव जालंधरी सप्त दीपे , देवी कंदरे सरवरे वाव कूपे ||34|| देवी मेटळीमाळ घूमे गरब्बे , देवा काछ कत्रोज आसांम अम्बे ; देवी सब्ब खंडे रसा गिरिश्रृंगे , देवी बंकड़े दुर्गमे ठाँ विहंगे ||35|| देवी वम्मरे डूंगरे रत्र वत्रे , देवी थूँबड़े लींबड़े थत्र थत्रे ; देवी झंगरे चाचरे झब्ब झब्बे , देवी अंबरे अंतरीखे अलंबे ||36|| देवी निरझरे तरवरे नगे नेसे , देवी दिसे अवदिसे देसे विदेसे ; देवी सागरं बेटड़े आप संगे , देवी देहरे घरे देवी दुरंगे ||37|| देवी सागरं सीप में अमी श्रावी , देवी पीठ तव कोटि पच्चास पावे ; देवी वेलसा रूप सामंद वाजे , देवी बादळां रूप गैणाग गाजे ||38|| देवी मंगला रूप तू ज्वाळमाळा , देवी कंठळा रूप तूं मेघ काळा; देवी अत्रलं रूप आकास भस्मे , देवी मांनवा रूप मृतलोक रम्मे ||39|| देवी पत्रागां रूप पाताळ पेसे , देवी देवता रूप तूं स्रग्ग देसे ; देवी प्रम्म रे रूप पिंड पिंड पीणी , देवी सून रे रूप ब्रह्मांड लीणी ||40|| देवी आतमा रूप काया चलावे , देवी काया रे रूप आतम खिलावे; देवी रूप वासन्त रे वन्न राजे , देवी आग रे रूप तूं वन्न दाझे ||41|| देवी नीर रे रूप तूं आग ठारे , देवी तेज रे रूप तूं नीर हारे ; देवी ज्ञान रे रूप तूं जग्त व्यापी , देवी जग्त रे रूप तूं धर्म थापी||42|| देवी धर्म रे रूप शिव शक्ति जाया , देवी शिव शक्ति रूपे सत माया ; देवी सत रे रूप तूं सेस मांही , देवी सेस रे रूप लिर धरा साही ||43|| देवी धरा रे रूप खम्मया कहावे , देवी खम्मया रूप तूं काळ खावे ; देवी काळ रे रूप उदंड वाये , देवी वायु जळ रूप कल्पांत थाये ||44|| देवी कल्प रे रूप कल्पांत दीपे, देवी विस्नु रे रूप कल्पांत जीपे ; देवी नींद रे रूप चख विसन रूढी , देवी विसन रे रूप तूं नाभ पूढ़ी ||45|| देवी नाभ रे कमळ ब्रह्मा निपाया , देवी ब्रह्मा रे रूप मधुकीट जाया ; देवी रूप मधुकीट ब्रह्मा डराये , देवी ब्रह्म रे रूप विस्नु जगाये ||46|| देवी विस्नु रे रूप जंघा वधारे , देवी मुकुंद रे रूप मधुकीट मारे ; देवी सावित्री गायत्री प्रम्म ब्रह्मा , देवी साच तण मेलिया जोग सम्मा ||47|| देवी सूनी रे दूध तें खीर रांधी , देवी मारकंड रूप तें भ्रांत बांधी ; देवी मंत्र मूलं देवी बीज बाला , देवी बापणी स्रब्ब लीला विसाला ||48|| देवी आद अत्राद ओंकार वाणी , देवी हेक हंकार हींकार जाणी ; देवी आप ही आप आपां उपाया , देवी जोग निद्रा भवं तीन जाया ||49|| देवी मत्रछा माईया जग्ग माता , देवी ब्रह्मा गोविन्द संभु विधीता; देवी सिद्धि रे रूप नव नाथ लाथे , देवी रिद्ध् रे रूप धनराज हाथे ||50|| देवी वेद रे रूप तूं ब्रह्मा वांणी , देवी जोग रे रूप मच्छंद्र जाणी ; देवी दान रे रूप बळराव दीधी, देवी सत रे रूप हरचंद सीधी ||51|| देवी रढ्ढ़ रे रूप दलकंध रूठी, देवी सील रे रूप सौमित्र त्रूठी; देवी सारदा रूप पींगळ प्रसनीं , देवी माण रे रूप दुर्डोण मत्री ||52|| देवी गदा रे रूप भुज भीम सोई , देवी साच रे रूप जुहिठल्ल ध्याई; देवी कुन्ती रूप तें कर्ण कीधा , देवी सासत्रां रूप सैदेव सीधा ||53|| देवी बाण रे रूप अर्जुण बन्नी , देवी द्रौपदी रूप पांचां पतनीं ; देवी पांच ही पाँडवाँ परे त्रूठी , देवी पांडवी कौरवां परे रूठी||54|| देवी पांडवां कौरवां रूप बांधा , देवी कौरवां भीम रे रूप खाधा ; देवी अर्जुणं रूप जैद्रथ्थ मार्यो , देवी जैद्रथ्थं रूप सौभद्र टार्यो ||55|| देवी रेणुका रूप तें राम जाय , देवी राम रे रूप खत्री खपाया ; देवी खत्रियां रूप दुजराम जीता , देवी रूप दुजराम रे रग्त पीता ||56|| देवी रग्त रे रूप तूं जग्त जाता, देवी जोगणी रूप तूं जग्त माता; देवी मात रे रूप तूं अमी श्रावे, देवी बाळ रे रूप तूं खीर धावे ||57|| देवी जस्सुदा रूप कानं दुलारे , देवी कान रे रूप तू कंस मारे; देवी चामुण्डा रूप खेतल हुलावे , देवी खेतला रूप नारी खिलावे ||58|| देवी नारि रे रूप पुरसां धुतारी, देवी पुरसाँ रूप नारी पियारी; देवी रोहणी रूप तूं सोम भावे , देवी सोम रे रूप तूं सुधा श्रावे ||59|| देवी रूकमणी रूप तूं कान सोहे , देवी कान रे रूप तूं गोपि मोहे ; देवी सीत रे रूप तूं राम साथे , देवी राम रे रूप तूं भग्त हाथे ||60|| देवी सावित्री रूप ब्रह्मा सोहणी , देवी ब्रह्मा रे रूप तूं निगम वाणी ; देवी गोरजा रूप तूं रूद्र राता , देवी रूद्र रे रूप तूं जोग धाता ||61|| देवी जोग रे रूपवगोरख्ख जागे , देवी गोरखां रूप माया न लागे ; देवी माइया रूप तें विस्नु बांधा , देवी विस्नु रे रूप तें दैत खाधा ||62|| देवी दैत रे रूप तें देव ग्रहिया , देवी देव रे रूप के दनुज दहिया ; देवी मच्छ रे रूप तूं संख मारी , देवी संखवा रूप तूं वेद हारी ||63|| देवी वेद सुधवार रूप करया, देवी चारणां वेद ते वार पाया ; देवी लख्खमी रूप तें भेद दीधा , देवी राम रे रूप तें रतन लीधा||64|| देवी ददसरथं रूप श्रवणं विडारी , देवी श्रव्वणं रूप पितु मात तारी ; देवी केकयी रूप तें कूड़ कीधा , देवी राम रे रूप वनवाल लीधा ||65|| देवी नृग रे रूप तें सीत मोई , देवी राम रे रूप पाराध होई ; देवी बाण रे रूप मारीच मारी , देवी मार मारीच लखणं पुकारी ||66|| देवी लख्खणं राम पीछे पठाई , देवी रावणं रूप सीता हराई; देवी सक्रारी रूप हनमंत ढाळी, देवी रूप हनमंत लंका प्रजाली ||67|| देवी सांग रे रूप लखणं विभाड़े , देवी लख्खणं रूप घननाद पाड़े ; देवी खगेसं रूप तें नाग खाधा , देवी नाग रे रूप तें हरसेन बांधा ||68|| देवी छकारा रूप तें राम छळिया , देवी राम रे रूप दसकंध दळिया ; देवी कान रे रूप गिरि नख्ख चाडे , देवी नख्ख रे रूप ह्रणकंस फाडे ||69|| देवी नाहरं रूप ह्रणकंस खाया , देवी रूप ह्रणकंस इन्द्रं हराया ; देवी इंद्र रे रूप तूं जग्ग तूठी, देवी जग्ग रे रूप तूं अन्न वूठी ||70|| देवी रूप हैग्रीव रे निगम सूस्या , देवी हैग्रीव रूप हैग्रीव धूंस्या; देवी राहु रे रूप तें अमी हरिया , देवी विस्नु रे रूप तें चक्र फरिया ||72|| देवी संकरं रूप त्रीपूर वींधा , देवी त्रीपुरं रूप त्रीपुर लीधा; देवी ग्राह रे रूप तें गज्ज ग्राया , देवी गज्ज गोविन्द रूपे छुड़ाया ||७२|| देवी दधीची रूप तें हाड दीधो , देवी हाड रो तख्ख तें वज्र कीधो ; देवी वज्र रे रूप तें व्रत्र नाश्यो,देवी वज्र रे रूप तें शक्र त्राश्यो ।।७३।। देवी नारदं रूप तें प्रश्न नाख्या , देवी हंस रे रूप तत ज्ञान भाख्या ; देवी ज्ञान रे रूप तूं गहन गीता , देवी कृष्ण रे रूप गीता कथीता ।।७४।। देवी बालमीक ब्सास रूपे तूं कृतं , देवी रामायण पुराणों भागवतं; देवी काबा रे रूप तूं पाथ लूंटे , देवी पाथ रे रूप भाराथ जुटे ।।७५।। देवी रूप अंधेरवरेवसूर गंजे , देवी सूरजं रूप अंधेर भंजे ; देवी मैख रे रूप देवां डरावै , देवी देवता रूप तूं मैख खावै ।।७६।। देवी तीर्थ रे रूप अघ विसम टारे , देवी ईश्वरं रूप अधमं उधारे ; देवी पौन रे रूप तूं गरूड़ पाडे , देवी गरूड़ रे रूप चत्रभूज चाडे ।।७७।। देवी माणसर रूप मुगता निपावे , देवी मराल् रूप मुगता तूं पावे ; देवी वामणं रूप बळराव भाड़े , देवी रूप बळराव मेरू उपाड़े ।।७८।। देवी मेरगिर रूप सायर वरोळे , देवी सायरं रूप गिरमेर बोळे ; देवी कूर्म रे रूप तूं मेर पूठी , देवी वाडवा रूप तूं आग ऊठी ।।७९।। देवी आग रे रूप सुर असुर डरीया , देवी सरसती रूप तें तेथ धरिया ; देवी घड़ा रे रूप अगसत दीधो , देवी अगस्त रूप सामंद पीधो ।।८०।। देवी समुंद्र रे रूप तें हेम ठळिया , देवी पांडवां हेम रे रूप गळिया ; देवी पांडवां रूप तें भ्रांत भांगी , देवी भ्रांत रे रूप तूं राम लगी ।।८१।। देवी राम रे रूप तूं भगत तूठी , देवी भगत रे रूप बैकुंठ बूठी ; देवी रूप बैकुंठ परब्रह्मा वासी , देवी रूप परब्रह्मा सबमें निवासी ।।८२।। देवी ब्रह्मा तूं विस्नु अज रूद्रराणी , देवी वाण तूं खाण तूं भूत प्राणी ; देवी मन्त्र तूं पवन तूं मोख माया , देवी क्रम्म तूं ध्रम्म तूं जीव काया ।।८३।। देवी नाद तूं बिन्दु तूं नव्व निद्धि , देवी सीव तूं सक्ति तूं स्रब्ब सिद्धि ; देवी बापड़ा मानवी कांई बूझे , देवी ताहरा पार तूं हीज सूझे ।।८३।। देवी तूंज जांणै गती गहन तोरी , देवी तत रूपं तूंज मोरी ; देवी रोग भव हारणी त्राहि मामं , देवी त्राहि त्राहि देवी त्राहि माम ।।८५।। ( देवी बारहट ईसरो बिरदावे , देवी सेवियां स्रब सुख पावे ) सम्पादक. -- अर्जुन दान किनया (फलोदी ) जोधपुर